भोपाल एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जो बहुत ही हरा भरा क्षेत्र है। भोपाल मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है और यह मध्य प्रदेश का मुख्य और बड़ा शहर भी हैं। भोपाल की सांस्कृतिक विरासत बहुत ही समृद्ध है। तथा प्राकृतिक सुंदरता बहुत थी खूबसूरत है।
भोपाल के प्रमुख एवं प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
ऊपरी झील
भोपाल की सबसे बड़ी और प्रमुख झील ऊपरी झील है, इससे भोपाल का बड़ा तालाब भी कहा जाता है। इस झील का निर्माण 11वीं शताब्दी में किया गया था। यह भारत की सबसे पुरानी कृत्रिम झील है। इस झील के द्वारा शहर के लोगों को पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तथा फसलों के लिए भी पानी दिया जाता है।
इस झील के अंदर आपको स्पीड बोट की भी सुविधा उपलब्ध है।
इस झील के किनारे एक पार्क भी है, जिसका नाम कमला पार्क है। यह पार्क बहुत ही खूबसूरत हैं, इस पार्क के अंदर आपको पैरासेलिंग एवं कयाकिंग जैसी एक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध है। इस झील के किनारे राजा भोज की खूबसूरत प्रतिमा स्थापित है।
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान
भोपाल शहर के अंदर बहुत ही शानदार और खूबसूरत पार्क बना हुआ है। यह पार्क 11 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पार्क के अंदर विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे हैं और इस पार्क के अंदर आप पैदल घूम सकते हैं। साइकिल के द्वारा, या ई स्कूटी के माध्यम से आप इस अभ्यारण में भ्रमण कर सकते हैं। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के अंदर आपको विभिन्न प्रकार के जानवर देखने को मिलेंगे। अगर आप सुबह के समय इस अभ्यारण की सैर करते हैं, तो आपको विभिन्न प्रकार के पक्षी भी देखने को मिलेंगे।
मोती मस्जिद
मोती मस्जिद का निर्माण सिकंदर बेगम द्वारा सन 1860 ईस्वी में करवाया गया था। इसका निर्माण मूगल शैली में किया गया है। इस मस्जिद की गुंबद सफेद संगमरमर के पत्थर से बनाई गई है। तथा इसकी शानदार दो मीनार बहुत ही खूबसूरत लगती है।
शौकत महल
शौकत महल का निर्माण 1830 ईस्वी में करवाया गया था। इसके निर्माण में इस्लामिक और फ्रांसीसी शैली का मिश्रण है। भोपाल के प्राचीन शहर में यह महल स्थित है। यह महल एक समय शाही संपत्ति का हिस्सा था। आज के समय इसका उपयोग प्रदर्शनी एवं स्थानीय कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। इस महल के बाहरी भाग ही पर्यटनों के लिए खुले हैं। अंदर के भाग अभी तक पर्यटकों के लिए नहीं खोले गए हैं।
बिड़ला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर)
संगमरमर से निर्मित मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। यह मंदिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस मंदिर के चारों ओर खूबसूरत बगीचा है। यह मंदिर अरेरा की पहाड़ियों के गुंबद पर स्थित हैं। इस मंदिर की शानदार नक्काशी इसके खूबसूरती के चार चांद लगा देती हैं।
निचली झील
निचली झील को छोटा तालाब झील भी कहा जाता है। इस झील के अंदर नौका विहार की सुविधा उपलब्ध है। सुबह या शाम के समय छोटी सी झील के किनारे आप घूम सकते हैं। इस झील के किनारे बहुत ही शानदार और शांत वातावरण होता है।
बिरला संग्रहालय
पुरातत्व विभाग में रुचि रखने वालों के लिए यह बहुत ही शानदार जगह है। बिरला संग्रहालय अरेरा की पहाड़ियों में स्थित है। इस संग्रहालय के अंदर प्रागैतिहासिक औजार, विभिन्न जनजातियों की कलाकृतियां, पत्थर की नक्काशी आदि का संग्रह किया गया है। बिरला संग्रहालय की स्थापना 1971 ईस्वी में की गई थी। बिरला संग्रहालय के अंदर आपको विष्णु, शिव, चामुंडा आदि की दुर्लभ प्रतिमाएं देखने को मिलेगी। ईस संग्रहालय के अंदर आपको नवपाषाण और ताम्र पाषाण काल के विभिन्न प्रकार के औजार भी देखने को मिलते हैं।
ताज उल मस्जिद
ताज उल मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में गिनी जाती हैं। इस मस्जिद के निर्माण में गुलाबी बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है, इसके अंदर तीन गुंबद हैं। इस मस्जिद के बीच में बहुत बड़ा विशाल आंगन है तथा मीनार भी हैं। इस मस्जिद का निर्माण शाहजहां बेगम के कार्यकाल में हुआ था। इस मस्जिद की दीवारों पर शानदार और बारीक नक्काशी की गई है। नमाज के समय के अलावा यह मस्जिद पर्यटकों के लिए खुली रहती है।
भोजपुर शिव मंदिर
भोपाल से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, यह भोजपुरी शिव मंदिर बहुत ही शानदार और आकर्षक मंदिर हैं। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी के अंदर राजा भोज के द्वारा किया गया था। यह शिव मंदिर का शिवलिंग देश के सबसे बड़े शिवलिंगों में गिना जाता है। इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 7.5 फीट के आसपास हैं।
गोहर महल
गौहर महल भोपाल का प्रमुख और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। गौहर महल का निर्माण 1820 ई के अंदर करवाया गया था। इसका निर्माण यहां की पहली महिला शासक कुदसिया बेगम जिसका दूसरा नाम गौहर बेगम भी था, जिसने करवाया था। इस महल के निर्माण के अंदर हिंदुस्तानी और इस्लामी शैली का मिश्रण है। इस महल के अंदर शानदार नकाशी वाले झरोखे, बहुत बड़ा आंगन देखने लायक है। आम दिनों में इसका भ्रमण करना बिल्कुल निशुल्क होता है।
रायसेन किला
भोपाल शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर, एक पहाड़ी के ऊपर यह किला बना हुआ है। किले परिसर के अंदर पुराने मंदिर बने हुए हैं। यह किला सैन्य और सांस्कृतिक विरासत का शानदार उदाहरण है।
जनजातीय संग्रहालय, भोपाल
मध्य प्रदेश जनजातीय कल्याण विभाग द्वारा इस जनजातीय संग्रहालय का संचालन किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य की विभिन्न जनजातियों का रचनात्मक रूप से चित्रण किया गया है। जनजातीय संग्रहालय के अंदर मध्य प्रदेश के आदिवासी लोगों के घरों विभिन्न प्रकार के अनुष्ठानों तथा शादी एवं विभिन्न उत्सवों शिकार करने के दर्शियों आदि को रंगीन तरीके से दर्शाया गया है।

